WhatsApp ऑटोमेशन · नंबर शामिल

बिज़नेस ओनर्स के लिए WhatsApp ऑटोमेशन

बिज़नेस ओनर्स के लिए WhatsApp ऑटोमेशन उन्हीं मैसेज से शुरू होता है जिनका जवाब आप दिन में चालीस बार देते हैं: मेरा ऑर्डर कहाँ है, दाम क्या है, गुरुवार की बुकिंग हो सकती है क्या. जो जवाब आप देते, वही बता दीजिए — AgentUI ऑटोमेशन बना देगा, उसे आपके असली डेटा से जोड़ेगा और जैसे ही बात रूटीन से हटेगी, चैट किसी व्यक्ति को सौंप देगा. हर बातचीत सेव रहती है, ताकि कारोबार आपके फ़ोन पर टिका न रहे.

WhatsApp नंबर शामिल है — कुछ भी कनेक्ट नहीं करना, न Meta Business सेटअप, न API मंज़ूरी का इंतज़ार. चाहें तो बाद में अपना नंबर जोड़ लीजिए.

Agent UI के ऑटोमेटेड असिस्टेंट के साथ WhatsApp चैट — पहचान संख्या माँगता है, रजिस्ट्रेशन कन्फ़र्म करता है और ग्राहक का पॉइंट बैलेंस बताता है
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WhatsApp ऑटोमेशन कैसे बनता है — आसान भाषा में

आप फ़्लो वैसे ही बताइए जैसे किसी नए कर्मचारी को समझाते हैं: "कोई ट्रैकिंग नंबर भेजे तो उसे देखकर स्टेटस बता दो; और कुछ पूछे तो मुझे भेज दो." AgentUI ट्रिगर, स्टेप्स और जवाब बनाता है, हर हिस्सा दिखाता है और आपके WhatsApp नंबर पर चलाता है.

AgentUI में चैट से बनी WhatsApp ऑटोमेशन: WhatsApp ट्रिगर, इंटेंट पहचान, कंटेनर लुकअप और ग्राहक को जवाब भेजने का स्टेप
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उन मालिकों के लिए जिनका फ़ोन ही रुकावट है — 40 सीट वाले कॉल सेंटर के लिए नहीं

दुकानें, क्लीनिक, वर्कशॉप, डिस्ट्रीब्यूटर और डिलीवरी कारोबार जो ऑर्डर, कोटेशन और बुकिंग दो-तीन फ़ोन पर WhatsApp से चलाते हैं. न डेवलपर है, न आप Cloud API के डॉक्युमेंट पढ़ने वाले हैं, और न हफ़्ते भर काम रोककर प्रयोग करने की गुंजाइश है.

AgentUI का डेटाबेस स्क्रीन जिसमें WhatsApp से जुड़ी डेटाबेस दिखती हैं — बातचीत वाली WhatsappBotDB, इमेज लॉग वाली whatsapp_media और डिलीवरी डेटाबेस
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हर चैट ऐसी डेटाबेस में जाती है जिसे आप सच में खोल सकते हैं

ऑर्डर, ट्रैकिंग नंबर, रजिस्ट्रेशन और ऑटोमेशन के दिए गए जवाब आपकी अपनी डेटाबेस में दर्ज होते हैं — किसी के फ़ोन में बंद नहीं रहते. किसे क्या वादा हुआ, उसकी रिपोर्ट निकालिए, वही डेटा टीम के डैशबोर्ड से जोड़िए और स्क्रीनशॉट से हफ़्ते भर की बातचीत जोड़ना बंद कीजिए.

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ऑटोमेशन जानता है कि कब रुककर इंसान को बुलाना है

WhatsApp बॉट का सबसे बड़ा डर यही है कि ग्राहक लूप में फँसा रहे और साख गिरती जाए. तय कीजिए कि कौन-से मामले इंसान तक जाने चाहिए — शिकायत, रिफ़ंड, या जहाँ ऑटोमेशन को भरोसा न हो — और चैट पूरे इतिहास के साथ सौंप दी जाती है, ताकि ग्राहक को दोबारा सब बताना न पड़े.

AgentUI का कन्वर्सेशन मोड चयन — Planning, Build और Human, जहाँ Human विकल्प इंसान के लिए सपोर्ट टिकट बनाता है
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जिन चीज़ों से आपको नहीं जूझना पड़ेगा

मालिक WhatsApp ऑटोमेशन इसलिए नहीं छोड़ते कि मैसेज मुश्किल हैं — दिक्कत उसके आसपास की हर चीज़ होती है.

नंबर जोड़ना

WhatsApp नंबर सेटअप के साथ ही मिलता है. न Meta Business अकाउंट, न API मंज़ूरी की कतार — अपना नंबर तभी जोड़िए जब आप चाहें.

डेवलपर का इंतज़ार

बदलाव एक वाक्य में बताइए और वह उसी दिन लागू — न टिकट, न एजेंसी का रिटेनर.

चैट में फँसा डेटा

ऑटोमेशन जो भी छूता है, वह ऐसी डेटाबेस में लिखा जाता है जिसे आप देख, एक्सपोर्ट और आगे इस्तेमाल कर सकें.

बॉट लूप में फँसा नाराज़ ग्राहक

नियम तय करते हैं कि क्या इंसान तक जाना चाहिए, और चैट पूरे इतिहास के साथ सौंपी जाती है.

किसने क्या देखा

रोल के हिसाब से एक्सेस और हर बदलाव का ऑडिट लॉग, AI के किए बदलाव भी शामिल.

हर सीज़न दोबारा बनाना

नया ऑफ़र, नई रेट लिस्ट, नया समय — ऑटोमेशन आप खुद एक वाक्य में बदल लेते हैं.

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कॉल बुक करने के बाद क्या होता है

हम उन्हीं मैसेज से शुरू करते हैं जो सच में आ रहे हैं: कॉल पर बीस असली WhatsApp बातचीत लाइए और हम तय करेंगे कि कौन-सी ऑटोमेशन से निपट सकती हैं, कहाँ इंसान चाहिए और पहले कौन-सा डेटा जोड़ना है. मुफ़्त शुरू करके खुद बनाइए, या हमारी टीम पहला फ़्लो आपके साथ सेट करे और आज जो फ़ोन उठाता है उसे ट्रेनिंग दे.

बताइए किस मैसेज का जवाब देते-देते थक चुके हैं. सबसे पहले उसी को ऑटोमेट करेंगे.